Thursday, February 17, 2011

गठबंधन की लाचारी या मन ही भ्रष्ठाचारी है

ये असल कमीने छिपे शफ्फाफ पोशाको में
नित नित लूट माल भरते निज तोशाखाने में

बदनाम करें खुद करतूतों से पंथ विशेष को
की फांसी दी तो विशेष नष्ट करदेंगे देश को

अमित आस बस नेक्स्ट जेन के भरोसे है
वरना गठबंधन के लाचारी मन मसोसे है



गठबंधन की लाचारी या मन ही भ्रष्ठाचारी
है
प्यादे को करके आगे खा रही विदेशी नारी है
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शफ्फाफ पोशाको ---- सफ़ेद कपडे, (उज्जवल चरित्र के सन्दर्भ में)
तोशाखाने ---- तिजोरी वस्त्रों और आभूषणों आदि का भण्डार।
नेक्स्ट जेन ---- युवा पीढ़ी से तात्पर्य


3 comments:

  1. Awesome Amit sir...
    last line to bahot achi hai...
    but kya kare yahi desh ki haalat hai
    mene bhi esa hi kuch likha tha 26th, Jan ko
    http://basantkrverma1990.blogspot.com/2011/01/is-26th-jan-reason-of-celibration-now.html

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  2. भाई, होना तो सहमत चाहिये लेकिन विदेशी नारी से ज्यादा कसूरवार तो देसी ....... लगते हैं।

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  3. .


    कविता ने है कर दिया
    मेरा कंठ अवरुद्ध.
    भ्रष्ट राग गाता फिरा
    नहीं हुआ कुछ शुद्ध.

    नहीं हुआ कुछ शुद्ध
    तनाव की तपन झुलसता.
    सत्य सूर्य को आज़
    भ्रष्ट बादल भी ग्रसता.


    .

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