Tuesday, June 15, 2010

अमित तेज दिगंत माही पसर्यो, महाराणा थारी करणी को ----- अमित शर्मा




धन तिथि तीज सुक्ल जेठा पन्द्रसै सोल्हा पावनी
धन-धन परतापी भौम मेवाड़ी,प्रताप जन्म दायनी 
बाप्पा कीरत पताका थाम्ही,थाम्ही टेक सांगा की
शौर्य धार्यो सूर्य सो प्रखर, निर्मलता धारी गंगा की
निज धरम की धारणा राखी,मान राख्यो वीर  धरणी को
अमित तेज दिगंत माही पसर्यो,महाराणा थारी करणी को  


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26 comments:

  1. राजपूती आन एवं शौर्य का वह पुण्य प्रतीक महाराणा प्रताप,ने जो धर्म एवं स्वाधीनता के लिये ज्योतिर्मय बलिदान किया, वब विश्व में सदा परतन्त्रता और अधर्म के विरुद्ध संग्राम करनेवाले, मानधनी, गौरवशील मानवों के लिये मशाल सिद्ध होगा।

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  2. अमित बाबु स्रोत फिर से फूट पड़ा . बहुत बढ़िया. अच्छी कविता

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  3. बड़ा प्रताप है जी राणाजी का.

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  4. अमित तेज दिगंत माही पसर्यो,महाराणा थारी करणी को

    jai Hind Jai Bharat !!!

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  5. त्याग व स्वाभिमान की इस मूर्ती को शत शत नमन !

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  6. Rashtra gauraw ke pratik Maha Ranapratap ko hardik naman

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  7. @ बाप्पा कीरत पताका थाम्ही,थाम्ही टेक सांगा की
    शौर्य धार्यो सूर्य सो प्रखर, निर्मलता धारी गंगा की

    अमित जी,
    वास्तव में महाराणा प्रताप में बाप्पा रावल और महाराणा सांगा का सारा स्वरुप समां गया था
    बहुत ही ओजस्वी रचना रची है आपने महानायक की वंदना में, आल राउंडर है आप हिंदी गद्य, कविता के साथ राजस्थानी में भी कविता !!!! बधाई आपको
    ऋतुपर्ण

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  8. शौर्य प्रतीक महाराणा प्रताप को नमन!

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  9. Bhai hume to bachpan me padha ye chhand yaad aata hai....
    Aage nadiya padi apaar, Chetak kaise utre paar?
    Rana ne socha is paar, Chetak tha us paar!
    Jai ho!

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  10. हमारा नमन उस महान यौद्धा, राज्यभक्त, वीर, स्वाभिमानी राणा को।

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  11. धन्य हो गया,महाराणा प्रताप के शौर्य को वन्दन,आपके वीररस काव्य को भी।

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  12. देशोद्धारक.धर्मरक्षक .महाराणा प्रताप का आदर्शवाक्य है "जो थिर राखे धरम को,तेहि राखे करतार "

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  13. शानदार भाई साहब!अभी समय नहीं है सो ये सिमित सी टिप्पणी केवल....

    कुंवर जी,

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  14. बहुत कमाल की ओजस्वी रचना है जी, नमन इस धरती माँ के सपूत को !! नमन आपके भाव और लेखन को ,

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  15. Ye Kavita Hamare Gaurav Maharana Pratap ki pavitra veerta ka gaan hai.Maharana ki jai ho.

    Hemant Koushik

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  16. सुन्दर लिखा आपने ..बधाई.

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  17. ओज गुण से भरी-पूरी रचना.

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  18. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ... नमन!

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