Wednesday, April 14, 2010

एक बंधु को फिर वेद ज्ञान के कारण अपच हो गयी है

एक बंधु को अभी फिरसे  वेद ज्ञान के कारण अपच हो गयी है,और वामन करते फिर रहे है। अरे भाई इस ज्ञान  का उपयोग किसी ज्ञानी व्यक्ति द्वारा ही कराना चाहिए, अन्यथा अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है।
मन्त्रों का पाठ शुद्ध होना अनिवार्य है। और फिर उनका शुद्ध अर्थ भी होना चहिये। अब बताये कोई की शेरनी का दूध भी कही सोने के बर्तन के अलावा कीसी  दुसरे धातु के बर्तन में ठहर सकता है ? अब जनाब सारे दिन खोजबीन के "बृहदारण्यकोपनिषद" का एक श्लोक उठा लाये जो की पति-पत्नी के दांपत्य जीवन से सम्बंधित मीठी तकरार का उल्लेख कर रहा  है  इस उपनिषत के छठे अध्याय के चौथे ब्राह्मण में मनोवांछित सन्तान की प्राप्ति के लिए मन्त्रों का विवेचन है। मन्त्र द्वारा गर्भाधान करना, गर्भनिरोध करना तथा स्त्री प्रसंग को भी यज्ञ-प्रक्रिया के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें कहीं भी अश्लीलता-जैसी कोई बात नहीं है। सृष्टि का सृजन और उसके विकास की प्रक्रियायों को शुद्ध और पवित्र तथा नैसर्गिक माना गया है। पंचभूतों का रस पृथ्वी है, पृथ्वी का रस जल है, जल का रस औषधियां हैं, औषधियों का रस पुष्प हैं, पुष्पों का रस फल हैं, फलों का रस पुरुष है और पुरुष का सारतत्त्व वीर्य है। नारी की योनि यज्ञ वेदी है। जो व्यक्ति प्रजनन की इच्छा से, उसकी समस्त मर्यादाओं को भली प्रकार समझते हुए रति-क्रिया में प्रवृत्त होता है, उसे प्रजनन यज्ञ का पुण्य अवश्य प्राप्त होता है। भारतीय संस्कृति में इस प्रजनन यज्ञ को सर्वाधिक श्रेष्ठ यज्ञ का स्थान प्राप्त है।
यहां 'काम' का अमर्यादित आवेग नहीं है। ऐसी अमर्यादित रति-क्रिया करने से पुण्यों को क्षय होना माना गया है। ऐसे लोग सुकृतहीन होकर परलोक से पतित हो जाते हैं। यशस्वी पुत्र-पुत्री के लिए प्रजनन यज्ञ-ऋतु धर्म के उपरान्त यशस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए रति-कर्म करने से पूर्व यह मन्त्र पढ़ें-
'इन्द्रियेण ते यशसा यश आदधामि।'इस मन्त्र का आस्थापूर्वक मनन करने से निश्चय ही यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी। इसके अलावा दही में चावल पकाकर खाने से व जल में चावल पकाकर व घी में मिलाकर खाने से भी पुत्र-रत्न की ही प्राप्ति होगी। यदि पति-पत्नी विदुषी कन्या की कामना करते हों, तो तिल के चावल की खिचड़ी बनाकर खानी चाहिए।
गर्भ निरोध का उपाय
यदि पति-पत्नी दोनों सन्तान नहीं चाहते या कुछ काल तक 'गर्भनिरोध' चाहते हैं, तो रति-क्रिया में परस्पर मुख से मुख लगाकर इस मन्त्र का उच्चारण करें-
'इन्द्रियेण ते रेतसा रेत आददे।' इससे कभी गर्भ स्थापित नहीं होगा। रजस्वला स्त्री को तीन दिन तक कांसे के पात्र में खाने का भी निषेध है। अधिक शीत और उष्णता से भी बचना चाहिए। माता को अपनी सन्तान को स्तनपान कराने से भी नहीं बचना चाहिए। यह धर्म-विरूद्ध है और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।
 अब बताइए की गृहस्थ के इन सामान्य क्रिया कलापों में भी कोई दुर्बुद्धि वासना का ही दर्शन करे तो उसे क्या कहा जाना चहिये. यह आप लोग बतलाइए।

9 comments:

  1. मित्र, तुम बहुत बढ़िया काम कर रहे हो...
    यह वेद और स्वच्छ म्लेच्छ हैं... ऐसे धूर्तों को सबक सिखाना आवश्यक है...

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  2. बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  3. "अरे भाई इस ज्ञान का उपयोग किसी ज्ञानी व्यक्ति द्वारा ही कराना चाहिए, अन्यथा अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है।"
    बिलकुल सही बात!अमित भाई आप भी कहाँ शेरो की बात सियारों को समझाने चले थे!बही पहले से से माना जाता रहा है कि.

    "ज्ञानी से ज्ञानी भिड़े,करे ज्ञान कि बात!
    इक मुर्ख भी आ जावे तो बजे जूत और लात!"

    खैर जिसकि बुद्धि जितना पचा सकती हो वो उस से अधिक कि बात कैसे समझेगा!उसकी भी मज़बूरी है!शायद इसीलिए शिक्षा को योग्यता के आधार पर ही देने कि बात कही गयी हो!

    कुंवर जी,

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  4. वेद के स्वाध्याय और चिन्तन का प्रयास अच्छा है. जन सामान्य तक वेद का सही रूप में पहुंचना आवश्यक है. अन्यथा इस तरह के भ्रम बने ही रहेंगे. सकारात्मक सोच के लोगों को मिलकर काम करना चाहिए.
    स्वामी शरण

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  5. वेद के स्वाध्याय और चिन्तन का प्रयास अच्छा है. जन सामान्य तक वेद का सही रूप में पहुंचना आवश्यक है. अन्यथा इस तरह के भ्रम बने ही रहेंगे. सकारात्मक सोच के लोगों को मिलकर काम करना चाहिए.
    स्वामी शरण

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  6. "ज्ञानी से ज्ञानी भिड़े,करे ज्ञान कि बात!
    इक मुर्ख भी आ जावे तो बजे जूत और लात!"

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  7. amit bhai maine vo lekh padha hai aur thoda ved aur kuran ka gyan bhi hai aur jo kaam ved me hai vo bura aur kuran me hai to shrestha hai aap aur mai to kya khud muhhamad bhi unhe nahi samjha sakte hai kyonki kuran me likha hai ki jab bhi tum ishe padhne ki ya samajhne ki koshish karoge to mai (allah) ushe gumrah kardega

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  8. जी भर के टिपियाने की छूट के लिए धन्यवाद। अच्छा लगा। यदि आपके पास नेट पर कोई लिंक हो जहां सम्पूर्ण ऋग्वेद पाठ उचित स्वर में किया गया हो तो कृपया देने का कष्ट करें। मैंने यूट्यूब पर कुछ लिंक देखे हैं लेकिन या तो वे आधे-अधूरे हैं या पाठ उचित स्वर में नहीं किया गया है।

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जब आपके विचार जानने के लिए टिपण्णी बॉक्स रखा है, तो मैं कौन होता हूँ आपको रोकने और आपके लिखे को मिटाने वाला !!!!! ................ खूब जी भर कर पोस्टों से सहमती,असहमति टिपियायिये :)