Thursday, April 29, 2010

मासूम परिंदों की प्यासी पुकार सुनिए, एक बर्तन पानी का भरकर रखिये ---- अमित शर्मा



इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है, और  इस गर्मी में अगर सबसे ज्यादा शामत किसी की आ रही है तो वे है बेजुबान पक्षी.
पेड़-पौधे, नदी-पर्वत की तरह  पशु-पक्षी भी पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं।बेजुबान पक्षियों की रक्षा हमारा कत्र्तव्य है, धर्म है।

बदलते पर्यावरण के बीच पक्षियों के लिए यह दौर चिंताजनक हो गया है। सबसे बड़ी चुनौती पक्षियों को गर्मी के मौसम में पीने के पानी की होती है। गावों में तो हालत फिर भी ठीक है पर शहरों में तो इन मासूमों को पीने को पानी ही नसीब नहीं हो रहा है. और इसकी जिम्मेदारी किसी सरकार की नहीं हमारी खुद की है. 

पक्षियों का यूं प्यासा रहना हमारे लिए अशुभ है। संसार के लिए भी और समूचे पर्यावरण के लिए भी।  इनकी पुकार को सुनें और इनके लिए जलपात्र घर की छतों पर रखें ताकि ये प्यासे न मरें। इन्हें जीवन मिले, संरक्षण मिले, मान मिले। यह सब हमारे ही हित में है। इन पक्षियों के सुरक्षित जीवन के लिए जल का प्रबंध जरूर करें।
मेरे आप सभी से अपील है  की कि पात्र में जल भरकर घर की छत या बालकनी में रखें ताकि पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। गर्मी में प्यास से सैंकड़ों पक्षियों की मौत हो जाती है या उन्हें काफी भटकना पड़ता है। परिंदों की इस तडफ़ को रोका जा सकता है महज एक जलपात्र रखकर।
आइये संकल्प लें और जलपात्र की व्यवस्था करके ओरों को भी प्रेरित करें.

26 comments:

  1. घर पे तो लगा रखा है माताजी ने आज ही ऑफिस में भी लगता हूँ और अपने साथियों को भी प्ररित करूँगा .
    एक अच्छी पहल की शुरुवात के लिए धन्यवाद्

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  2. "पक्षियों का यूं प्यासा रहना हमारे लिए अशुभ है। संसार के लिए भी और समूचे पर्यावरण के लिए भी। इनकी पुकार को सुनें और इनके लिए जलपात्र घर की छतों पर रखें ताकि ये प्यासे न मरें।"

    प्रकृति करती सब अपने आप, ये तो ठीक बात है,
    पर माध्यम चुनती वो हम में से ही,ये भी करामात है,
    प्रेरणा भी वो ऐसे ही देती,नहीं ये कोरे जज्बात है,
    आज 'अमीत' बन पुकारा तो आपके क्या ख्यालात है!


    अमित भाई मै जब भी थोडा लापरवाह हूँ!ये काम नियमित नहीं कर पता हूँ!पर अब शायद कुछ नियमित हो!

    कुंवर जी,

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  3. मैं रोज़ ६ मिट्टी के कटोरियों में पानी और ब्रेड के टुकड़े अपनी छत और बाउंड्री पर रखता हूँ.... यह सिलसिला पिछले पांच सालों से जारी है.... बहुत सुकून मिलता है....यहाँ तक की मेरे कुत्ते भी बहुत सपोर्ट करते हैं.... और परिंदों पर भौंकते नहीं हैं... इन बेजुबानों की दुआएं बहुत काम आतीं हैं....

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  4. भाई अमित जी
    आप वास्‍तविकता में बडे ही अच्‍छे इन्‍सान हैं वरना आज के भौतिक युग में लोग अपने घर वालों की भी परवाह नहीं करते।

    प्रकृति के साथ आपका ये प्रेम 'वसुधैव कुटुम्‍बकम' की उक्ति को चरितार्थ करता है।
    आपका आभारी हूं क्‍यूंकि भले ही मै रोज सुबह से लेकर शाम तक अपनी छत पर पक्षियों के पीने के लिये भरा हुआ टब रखता हूं पर मैने इस बात की प्रेरणा अन्‍य लोगों को नहीं दी।


    भाई महफूज जी की यहृदयता को भी मेरा सत-सत नमन कि ये प्रक्रम वो पिछले पांच वर्षो से निरन्‍तर कर रहे हैं।


    आज फिर लग रहा है कि मै अपने भारत देश में ही हूं। और महापुरूषों के बहुत करीब हूं।


    आप सब का बहुत आभार

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  5. aapki is jaankari ke liye dhanyawaad
    bilkul ji ye hamara kartavya bhi banta hain

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  6. सहमत अमित नेक आह्वान है

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  7. ye hamara kartavy bhi banta hain ki insaan hone ke naate hamari thodi si susti ke karan koi bhi jeev pyaas ke kaaran na mare.

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  8. ये एस एम् एस पिछले दो सालो से चल रहा है लगता है अमित को आज मिला है .

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  9. kyo benami tum ko dukh hua kya ki amit ji ne yeh apil ki to tumhare boss to gandgi failane men hi lage huye h.

    or tumhare upar to or taras aaya ki tumhe sirf do saal se hi iske bare men pata chala hai, kyonki ye to sadiyon se hamari parampra rahi hai.

    thu hai tum par

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  10. काफी अच्छा लगा आप सभी की कमेन्ट पढ़कर .आप सभी के कहने से यह बात पक्की हो गयी की बेजुबानो की पुकार सुनने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. इस अप-धापी में कुछ काम तो इनकी जिंदगी बचने का भी तो करना ही चहिये.

    @ बेनामीजी S.M.S. का तो मालूम नहीं पर हमारे यहाँ के दो प्रमुख समाचार पत्रों ने यह मुहीम पिछले ३-४ सालों से चला रखी है, और जैसा की पुश्पेंद्रजी जी ने कहा सदियों पुराने संस्कार है सिर्फ आलस ही इसको निभाने में मोटा रोड़ा है.

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  11. ameet bahhi bahut badhiya he...me tagra bhar ke rajhta hoo...teen salo se bhar raha hoo...bhai aap ek hi baar blog per aaker rah gaye ..kripya doosare lakh per kooch teepanee de dhanya vad

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  12. बढ़िया नेक आव्हान :)

    हम तो राजस्थान के रहने वाले है पानी की कमी की दिक्कत जानते है इसलिए शुरू से ही पक्षियों के लिए अपने घर की छत पर पानी के भरे पात्र रखते है | हर सुबह इन पात्रों को पानी से भरते समय उनके पास बाजरे के दाने डालना भी कभी नहीं भूलते |

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  13. पाप-पुण्य इत्यादि की बात न भी करें तो भी प्राकृ्तिक सन्तुलन को बनाए रखने के लिए पशु-पक्षी इत्यादि अन्य जीवों के रक्षार्थ प्रयास करना हमारा कर्तव्य बनता है...इस आह्वान हेतु निश्चित ही आप साधुवाद के पात्र हैं.....

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  14. नेक सलाह,

    और एक सलाह —

    जल-पात्र के पास थोड़े कंकड़-पत्थर भी रखें.

    शायद किसी प्यासे कौवे को कंकड़-डाल कर पानी पीना पसंद हो.

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  15. उतम सलाह के लिए धन्यवाद!

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  16. नेक सलाह/ उत्तम विचार.

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  17. हे कोमल चित्त वाले भ्राता तुम्हारी अत्यंत कोमल भावनाए मेरे मन को भीतर तक छू गयीं । वैसे लोगों को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाला यह प्राणी संस्कार वश इस पुण्य कार्य को वर्षों से निभाता चला आ रहा है। (boy i am back)

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  18. पिछले कई सालों से रख रहे हैं ...वो भी एक नहीं ...दो - तीन ...!!

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  19. बढ़िया नेक आव्हान धन्यवाद!

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  20. चेताने के लिये आभार
    काफी समय से यह कार्य भूल गया थ।
    आज ही व्यवस्था करता हूं।

    प्रणाम स्वीकार करें

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  21. AMIT JI MAINE KAL SE HI OFF. MEN BHI 5-6 PARINDE LAGWA DIYE HAI OR MERE SAATH WALON NE BHI APNE-APNE GHAR PE LAGANE KI BAAT KAHI HAI .

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  22. पंछी नदिया पवन के झोंके कोई सरहद ना इन्हें रोके सरहदें इन्सानों के लिए हैं सोचो तुमने और मैने क्या पाया इन्सां हो के .......

    नेक सलाह :)

    प्रणाम स्वीकार करें....

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  23. आप सभी के कहने से यह बात पक्की हो गयी की बेजुबानो की पुकार सुनने में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. इस अप-धापी में कुछ काम तो इनकी जिंदगी बचने का भी तो करना ही चहिये.

    आप सभी का बहुत आभार !

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