Sunday, March 21, 2010

इसलिए मुझे हिन्दू धर्मं ईश्वर प्राप्ति के लिए सरल लगता है

क्या आप हिन्दू है ?
हाँ
 क्या सबूत है इसका ?
 मैं अपने को हिन्दू मानता हूँ .

इसके अलावा भी कोई सबूत है आपके पास ?
 है मै गाय,गायत्री ,गंगा ,वेद  को मानता हूँ .

दूसरे धर्मों के प्रति क्या भाव है ?
मैं सबका आदर करता हूँ .

क्या आप अन्य धर्मावलम्बियों से नफरत करतें है ?
बिलकुल नहीं , मैं किसी से नफरत नहीं करता . हिन्दू धर्म में तो जीवमात्र श्रीभगवान के अंश है .

क्या आप चाहतें है की मस्जिदे तोड़कर उनके स्थान पर मंदिर बनादियें जाएँ ?
नहीं पर जहां पहले मंदिर था और समय के फेर से उनमे बदलाव आगया हो ,वहां जरूर मंदिर होना न्यायोचित है .

क्या आप कभी हिन्दू धर्म छोड़ना पसंद करेंगे ?
नहीं कभी नहीं मेरी तो भगवान् से प्रार्थना है की मै जन्म-जन्मान्तरों में हिन्दू के रूप में ही जन्म लूं .

क्यों क्या हिन्दू धर्म के अतिरिक्त अन्य धर्मों में भगवत प्राप्ति नहीं होती ?
क्यों नहीं होती ,पर मुझे तो हिन्दू धर्म ही प्यारा है ,क्योंकि इसमें तो गरीब दीन- दुखियों की सेवा करने मात्र से ही मनुष्य मोक्ष का अधिकारी बनजाता है, भगवान् की पूजा अर्चना ,समाधि इनको भगवत प्राप्ति का अंग बताया है ,पर यह परमावश्यक  अंग नहीं बताये गएँ है.
ज्ञान को मोक्ष प्राप्ति का उपाय बताया गया है -"ज्ञान मोक्षप्रद वेद बखाना "
पर सबसे बड़ा धर्म सेवा को माना गया है, और दूसरों को दुःख पहुचाने को सबसे बड़ा अधर्म बताया गया है
"परहित सरिस धर्म नहीं भाई,पर पीड़ा सम नहीं अधमाई "
"अष्टादश पुरानेशु  व्यासस्य वचनं द्वयं ,परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम"
जबकि कई धर्मो इसको  स्पष्ट बताया गया है की- "जनसेवा ही पूरा धर्म नहीं है"
जो मेरे समझ में नहीं आती इसलिए मुझे हिन्दू धर्मं ईश्वर प्राप्ति के लिए सरल लगता है

10 comments:

  1. lage rahiye janab

    ReplyDelete
  2. मै भी ऐसा ही सोचता हूँ!
    कुंवर जी,

    ReplyDelete
  3. thik kaha aapne
    hame hindu aur hindutav par garv hona chahiye

    ReplyDelete
  4. बहुत बढिया लिखा है आपने. इसी तरह लिखते रहिए. सकारात्मक लिखने से पढने वालों को भी शांति मिलती है. मैंने आपके कई लेख देखे. सभी की विषय वस्तु शानदार है. शुभकामनाएं.

    ReplyDelete
  5. बेहतरीन लिखते हैं आप। इस ब्लॉग पर आकर बहुत ही गूढ़ ज्ञान मिला ।

    ReplyDelete
  6. उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का अत्यधिक आभार

    ReplyDelete
  7. Jai shree Krishna Bhai sahab,
    really such a nice thoughts bro...,
    i m also thinking dat "Y all people dont think like U yaar?
    Whats wrong with them ?
    Why Should they always trying to create differences between all among religions? what they got frm this?
    I m a Hindu, and i m feel proud to be an Indian rather than Hindu."

    ReplyDelete
  8. तार्किक विद्वान् अमित शर्मा जी!

    आपके विषय में काफी चर्चा सुनी। आपकी तार्किक टिप्पणियों की प्रतीक्षा में रहते हैं। आपके विचार राष्ट्रवाद की मज़बूत आधारशिला डाल सकते हैं। यूँ ही प्रवाह में रहें ।

    कुछ प्रश्न -

    — यदि आप मुसलमान परिवार में जन्म लेते क्या तब भी लोगों को यही धार्मिक मजबूती दिखती?

    — क्या परमात्मा की हिन्दू धर्म वाले परिवार में जन्म लेने पर सहमती- असहमति हुआ करती है?

    — क्या एक पाखण्ड के गढ़ को तोड़कर दूसरा पाखण्ड स्थापित करना उचित है?

    ReplyDelete
  9. Dharma bandho takashashila se jo brahaman dharma faila usaka naam kahibhi nahi milata usehi tapasviyonka dharma kahate hai. hindu shabda to musalmanone hame diya hai jisaka matalab hai atyanta hin log. mai khudako hindu nahi manata tapasvi manata hu.

    ReplyDelete

जब आपके विचार जानने के लिए टिपण्णी बॉक्स रखा है, तो मैं कौन होता हूँ आपको रोकने और आपके लिखे को मिटाने वाला !!!!! ................ खूब जी भर कर पोस्टों से सहमती,असहमति टिपियायिये :)